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आवास आवंटन की प्रक्रिया
  1. सामान्य पूल से मध्यप्रदेश शासन के सीधे नियत्रंण के अधीन कार्यरत् अधिकारियो ंएव कर्मचारियों को आवास आवंटन की पात्रता होगी ।
  2. 'ए' 'बी' 'सी' 'डी' एँव 'ई' श्रेणी के आवासों के मामले का निराकरण मध्यप्रदेश शासन , गृह विभाग द्वारा किया जाएगा ।
  3. 'एफ' 'जी' 'एच' और 'आई' श्रेणी के आवासों के मामले का निराकरण संपदा संचालनालय द्वारा किया जाएगा ।
  4. 'बी' 'सी' 'डी' एवं 'ई' श्रेणी के आवासों के लिए 'अग्रता तारीख' से ताप्पर्य ऐसी पूर्व तारीख से हैं जिससे कोई शासकीय कर्मचारी ऐसे विशिष्ट प्रकार के आवास से संगत, जिसके लिए वह हकदार हो, उपलब्धियां लगातार पाता रहा हो । एक ही तारीख से दो या दो से अधिक अधिकारियों को एक समान वेतन मिलने पर उनकी पारस्परिक वरिष्ठता उनकी भोपाल पदस्थापना की अवधि के आधार पर निर्धारित की जाएगी ।
  5. 'एफ' श्रेणी के आवासो में से 50 प्रतिशत आवास भोपाल में पदस्थापना की तारीख के आधार पर वरिष्ठताक्रमानुसार आवंटित किये जाएँगे । शेष 50 प्रतिशत आवासों को ऐसी ' अग्रता तारीख ' के आधार पर आवंटित किया जाएगा , जिस तारीख से कोई शासकीय अधिकारी / कर्मचारी ऐसे आवास से संगत उपलब्धियां लगातार पाता रहा हों ,
  6. 'जी' एवं 'एच' श्रेणी के आवासांे के लिये प्राप्त आवेदनों की भोपाल में नवीन पदस्थापना की तारीख के आधार पर वरिष्ठतानुसार सूची तैयार की जाएगी ।
  7. 'आई' श्रेणी के आवासों के लिये प्राप्त आवेदनों की भोपाल मे नवीन पदस्थापना की तारीख के आधार पर वरिष्ठतानुसार सूची तैयार की जाएगी , जिसे प्रत्येक दो वर्ष में अद्यतन किया जावेगा । इस सूची में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियो के आवेदन सम्मिलित किये जायेगें ।
  8. किसी अधिकारी / कर्मचारी का भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने / सेवानिवृत्त/त्यागपत्र/सेवा से प्ृाथक किए जाने /स्वर्गवास होने पर या अन्यथा अपात्र होने पर संपदा संचालनालय द्वारा तैयार की गई वरिष्ठता सूची से उनका नाम आवंटन हेतु विचार क्षेत्र से बाहर किया जा सकेगा।
  9. मध्यप्रदेश के उपक्रम, शासकीय संगठन , निगम , मंडल तथा सहकारी संस्थाओं , के अधिकारियों/ कर्मचारियों को सामान्य पूल के शासकीय आवासों के आवंटन की पात्रता नहीं होगी , परन्तु लेखबद्व किये जाने वाले कारणों से विशेष परिस्थितियों में राज्य शासन प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शासकीय सेवक को आवास आवंटित कर सकेगा । यह आवंटन प्रतिनियुक्ति की वास्तविक अवधि अथवा तीन वर्ष, इनमें से जो कम हो, के लिए होगा । तीन वर्ष उपंत प्रतिनियुक्ति जारी रहने पर इसे अधिकतम एक वर्ष तक बढाया जा सकेगा ।